Tag Archives: Editorial

आखिर इस अपराध की दुनिया का उद्देश्य क्या है ?

हत्या , मार-काट , चोरी , डकैती , लूट-पाट जैसी घटनाएँ अपराध की दुनिया की समान घटना मानी जाती है । ऐसी घटनाओं के पीछे अपराधियों का अपना एक उद्देश्य और स्वार्थ भी होता है । मगर , तत्कालीन समय चक्र में चल रहे एक अद्भुत अपराध का क्या उद्देश्य है ? आखिर महिलाओं के बाल काटने के पीछे किसी का क्या स्वार्थ हो सकता है ? Continue reading आखिर इस अपराध की दुनिया का उद्देश्य क्या है ?

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महाकाल के प्रति भक्तो की श्रद्धा क्षतिग्रस्त हो चुकी है ।

सावन मास को महादेव का प्रिय महीना माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सावन में भगवान शिव खुद भूलोक पर आते है । शायद यही वजह है कि इस महीने में प्राकृतिक सौंदर्य और खूबसूरत हो जाता है । साथ ही मनुष्य का मानसिक स्वरूप भी बेहद सुनहरा हो जाता है  Continue reading महाकाल के प्रति भक्तो की श्रद्धा क्षतिग्रस्त हो चुकी है ।

क्या अब दाढ़ी के दिन फिरे है ?

जंगली कहे जाते थे वो , जिनके दाढ़ी बड़े होते थे । या फिर साधू-संत , महात्मा , मौलवियो और ऋषि-मुनियों के ही चेहरे पर दाढ़ी देखा जाता था । समाज के एक मात्र छोटे से वर्ग की ही पहचान थी लम्बी दाढ़ी । अधिकांश मर्दो की मर्दानगी अमूमन उसकी मूछो की अकड़ पर ही दिखती थी Continue reading क्या अब दाढ़ी के दिन फिरे है ?

योग से बढ़ती है मनुष्य की योग्यता

मेल, मिलाप और मिलन जैसा गुण ही महज इंसान को महान बना देती है । ये प्रभावी गुण ‘योग’ के शाब्दिक अर्थ कहे जाते है । यानी योग को अपनाना खुद को विशिष्ट बनाना है । Continue reading योग से बढ़ती है मनुष्य की योग्यता

भारत पाकिस्तान संबंध- अपने नापाक हरकतों से पाक नहीं आ रहा बाज

भारत पाकिस्तान न तो सहज मित्र की तरह है। न तो प्रबल शत्रु की तरह । दोनों का इतिहास एक समान रहा है परंतु दोनों के बीच सहयोग और सद्भावना का आभाव है। Continue reading भारत पाकिस्तान संबंध- अपने नापाक हरकतों से पाक नहीं आ रहा बाज

युवा, देश के भविष्य निर्माता

केशव पराशर ,मुजफ्फरपुर

भारत एक लोकतान्त्रिक देश है। यह विविधताओं से भरा हुआ विश्व का अनोखा रास्ट्र है । इसकी सभ्यता और संस्कृति इतनी ऊँची है की , इसे देख कर दूसरे लोग भी लालायित रहते हैं| Continue reading युवा, देश के भविष्य निर्माता

माँ के लिए हर दिन होता है स्पेशल डे

कल मदर्स डे है,यानि की माँ का दिन।पर सच तो ये है कि माँ के लिए कोई स्पेशल डे नहीं होता, माँ का दिन तो हर रोज ही होता है। माँ! इस शब्द को सुनते क्षमा,त्याग,ममता,जैसे शब्दों का अनुसरण होने लगता है,यही सारी बाते माँ शब्द को महान बनाती है। Continue reading माँ के लिए हर दिन होता है स्पेशल डे

नारी सशक्तिकरण : महज़ एक लफ्ज़ या उद्देश्य

  • ज़ेबा फातिमा, मुजफ्फरपुर

नारी सशक्तिकरण महज़ एक लफ्ज़ बन कर रह गया है । अस्तित्व में इसको पूर्ण रूप से आजतक अपनाया नहीं गया है । हम जिस समाज में रहते हैं । वहां जन्म से ही लैंगिक भेदभाव शुरू हो जाता है । और इसका सफ़र मृत्यु तक जारी रहता है । विशेषकर भारत जैसे देशों में कभी धर्म के नाम पर , कभी जाती के नाम पर , कभी बढ़ते अपराध के नाम पर , समाज , लोग , पडोसी , रिश्तेदार , रीति रिवाज , संकार आदी के नाम पर स्त्रियों के साथ लैंगिक भेदभाव होते आए हैं । Continue reading नारी सशक्तिकरण : महज़ एक लफ्ज़ या उद्देश्य

मोबाइल की माया में घिर चुकी है संपूर्ण काया

विज्ञान के खोज और अविष्कार ने न सिर्फ मनुष्य की सोच और काम करने की क्षमता को बढ़ाया है बल्कि उसके जीने के तौर-तरीके को भी बदल दिया है । मोबाइल भी विज्ञान के आविष्कार का एक ऐसा ही अंश है। Continue reading मोबाइल की माया में घिर चुकी है संपूर्ण काया

नगर निगम चुनाव अंतिम पड़ाव पर

मुज़फ्फपरपुर : मुज़फ्फपरपुर नगर निगम चुनाव अब अपनी अंतिम कड़ी पर पहुँचने को है । सारे उम्मीदवार अपने -अपने क्षेत्र का कमान संभाल चुनाव के मैदान में कूदे हुए है । इसी  बीच सारे उम्मीदवार  के अपनी -अपनी प्रचार गाड़ियाँ है जो की खूबसूरत होर्डिंग से सजी हुई हैं, और लगभग हर गाड़ी से निकलती हुई धुन देशभक्ति है  , जहाँ डाल – डाल पर सोने की चिड़ियाँ , है प्रीत जहाँ की रीत सदा , ऐसा देश है मेरा । Continue reading नगर निगम चुनाव अंतिम पड़ाव पर